कागज़ का आविष्कार किसने और कब किया था

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कागज़ का आविष्कार किसने किया : हम बचपन से ही कागज़ से जुडी चीज़े से चारो ओर से गिरे हुए है। चाहे वो किताबे हो या अख़बार या पर्ची या बस की टिकट हमारे जीवन में कागज़ मनो हर तरफ कहीं न कही से जुड़ा हुआ है। आपने कभी सोचा है की कागज़ कहा से आया होगा इसका निर्माण कब कैसे और किसके द्वारा हुआ होगा यह सवाल ज़रूर आया होगा। हम अपने जीवन से जुडी इतनी एहम चीज़ की जानकारी का हक़ तो रखते ही है।

हम आपको एक आर्टिकल के माध्यम से बातयेंगे की कागज़ का अविष्कार किसने किया,और यह क्यों इतना ज़रूरी हो गया हमारे जीवन में। कितना अजीब और अस्चर्या जनक बात है की लोग एक कागज़ के टुकड़े पे पढ़के दुनिया की तरक्की को छू लेते है। तो आप जान ही गए होंगे कि  मानव जीवन में कागज़ की भूमिका कितने है।

कागज़ का आविष्कार किसने और कब किया था
कागज़ का आविष्कार किसने और कब किया था

जानिये कागज़ का आविष्कार किसने और कब किया था 

आजकल पढ़ने लिखने का समाज है। अगर आप पढ़े लिखे नहीं है तो आप समाज में ज़रूरी भी नहीं है में यह नहीं कह रही यह सही है। परन्तु शिक्षा पे सबको पूर्ण अधिकार है अगर आपको नहीं मिलता तो आप अपने अधिकार के लिए लड़ सकते है। परन्तु शिक्षा को अपने जीवन का आधार बनाइये यह आपको निराश नहीं करेगा। शिक्षा सिर्फ ज्ञान देती है बदले में कुछ लेती नहीं तो कागज़ को भूमिका दे कागज़ पे लिखे शब्दों को जीवन पे अमल करे सीखे और सिखाये। ज्ञान पे सबका बराबर का हक़ है।

कागज़ का अविष्कार काई लुन ने 202 ईश्वी पूर्व चीन में किया था। उन्होंने कागज़ का अविष्कार पूर्ण रूप से हान राजवंश के समय किया था। इसलिए चीन को ही कागज़ का अविष्कारक माना जाता है। यह तो सही बात है की कागज़ का अविष्कार पुरे तरीके से चीन में हुआ लेकिन चीन के बाद भारत ही ऐसा देश है जहाँ कागज़ बनना शुरू हुआ और उसका इस्तेमाल भी पूर्ण रूप से सही ढंग से भारत में ही हुआ।

चीन वैसे तो अविष्कारक के मामले में सबसे विर्धि पर रहता है पर कागज़ का अविष्कार मानो चीन के लिए ही नहीं पुरे संसार के लिए गर्व की बात है। आज कागज़ की किताबो और शिक्षा का क्या मोल है। उससे पूरा संसार वाकिब है। कागज़ की भूमिका की सबसे एहम है। संसार में उसको मिल अतुनिये है।

यह आर्टिकल कागज़ के अविष्कार के लिए लिखा गया था। पर यह केवल कागज़ के अविष्कार के लिए ही नहीं बल्कि कागज़ की भूमिका का भी जीवन में आईना दिखाने के लिए भी है। कागज़ की इज़्ज़त करना मनो शिक्षा की इज़्ज़त करना।

आजकल इस ऑनलाइन और डिजिटल के ज़माने की दुनिया में कागज़ का रोल रूप मनो खोता जा रहा है। पर हमे यह समझना भी ज़रूरी है की फ़ोन और लैपटॉप की दुनिया के आलावा भी दुनिया में कई लेखकों दवरा कागज़ के पनो पे किताबे लिखी गयी है। जो मनो एक अपनापन सा आपके मन में बैठा देती है। डिजिटल होना ज़रूरी है परन्तु अपने वजूद से जुड़े कागज़ से नहीं।

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Conclusion

हम आशा करते है की इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको कागज़ का अविष्कार किसने किया इस बात की पूरी जानकरी दे पाए है अगर आप इस आर्टिकल को ध्यान से पढ़ेंगे तो आपको बहुत सी बातें और भी सिखने को मिलेंगे और ऐसे और जानकरी के लिए हमारे आर्टिकल को पढ़ते रहे और जानकारी प्राप्त  करते रहे। 

हमने इस आर्टिकल के माध्यम के कागज़ का अविष्कार किसने किया ? इस बात की जानकरी दे रहे है और कागज़ की अहम भूमिका को प्रचरित कर रहे है। इस आर्टिकल के माध्यम से लोगो को कागज़ के जुडी एक एहम जानकारी प्राप्त होगी।

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